Thursday, January 15, 2009

इंटरनेट ही जिनगी बन गईल

This poem is dedicated to all those who cannot imagine life without the Internet !!

इंटरनेट ही जिनगी बन गईल
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फागुन के रात इंटरनेट में कट गईल
चाँद ऑनलाइन, कभी ऑफलाइन हो गईल
ईमेल चेक करत-करत भोर हो गईल
इंटरनेट ही सभके जिनगी हो गईल

रिश्ता-नाता से बातचीत छूट गईल
ई-कार्ड से पर्व-त्यौहार मन गईल
फ़ोन कम चैटिंग ज्यादा हो गईल
इंटरनेट ही सभके जिनगी हो गईल

कलम-स्याही से लिखल कम हो गईल
कंप्यूटर कोर्स गाँव में शुरू हो गईल
पंचांग-पंडित भी ऑनलाइन हो गईल
इंटरनेट ही सभके जिनगी हो गईल

शादी-बियाह-लगन कंप्यूटर से हो गईल
लड़का-लड़की मिलन वेबकैम से हो गईल
नौकरी जॉब पोर्टल से पक्का हो गईल
इंटरनेट ही सभके जिनगी हो गईल

मुख्य समाचार वेबसाइट से मिल गईल
दूर-भाष ब्रॉडबैंड कनेक्शन से मिल गईल
बिजली के बिल भी ऑनलाइन हो गईल
इंटरनेट ही सभके जिनगी हो गईल

पिक्चर के गाना एम्.पी.थ्री म्यूजिक बन गईल
आई-फ़ोन, आई-पॉड के भी सुविधा मिल गईल
युट्यूब पर रातों-रात केहू हीरो बन गईल
इंटरनेट ही सभके जिनगी बन गईल

गूगल-ब्लॉग-ऑरकुट से मन के तार जुड़ गईल
मईल-नीमन सब कुछ इंटरनेट पर मिल गईल
इतिहास पर ना, वेबसाइट पर बिस्वास जम गईल
इंटरनेट ही सभके जिनगी बन गईल


शैलेश मिश्र
जनवरी १५, २००९
डैलस, टेक्सास (अमेरिका)
www.BhojpuriExpress.com
www.Bhojpuri.us
www.BhojpuriIndia.org

1 Comments:

At 11:39 PM , Blogger one world news said...

हाय, मेरा नाम oneworldnews है, और मैंने आप का बलौग पढा. वास्तव में य़ह विश्व के मुख्य समाचार के बारे मे शानदार जानकारी है और मुझे यह पसंद है. यदि आप अधिक जानकारी चाहते हैं तो यहा जाएं.- ऑनलाइन मुख्य समाचार

 

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