लाइफ में वाईफ क्यों चाहिए ? पत्नी को पति क्यों चाहिए ?

लाइफ में वाईफ क्यों चाहिए ? पत्नी को पति क्यों चाहिए ? जवाब मिला - पता नहीं...!
अक्सर लोग शादी को एक रिश्तों का बंधन नहीं बल्कि हसीन सुहाना सफ़र समझते हैं | हिन्दी फिल्म की तरह एक हसीन चेहरा का सपना संजोते हैं | क्या लोग चेहरा देखकर शादी के लिए हाँ कहते हैं ? शादी से मानसिक सुख की अपेक्षा होती है या शारीरिक सुख की ? शायद दोनों ही ! हर लड़का-लड़की के मन में अपने हमसफ़र की तस्वीर छुपी होती है जो उसे रात और सुबह गुदगुदाती है, उसके चेहरे पे मुस्कान की रेखा खींच देती है और जाने-अनजाने में वो तस्वीर को हम रोज़ अजनबी लोगों के बीच तलाशते हैं | शादी के बाद लाइफ कैसी होगी, किसे पता, किसको खबर और क्यों करें चिंता ? पहले लाइफ पार्टनर तो मिले, फिर सोचेंगे | पर क्या वोह पार्टनर हम खुद चुनेंगे या परिवार हमसे चुनवायेगा ? आखिर सही पार्टनर कौन है - यह पता कैसे चलेगा ? दो-चार दिन की एक्टिंग तो कोई भी कर सकता है | शुरू में लड़केवाले और लड़कीवाले दोनों ही सभ्य-सुशील-संस्कारिक जान पड़ते हैं | किसी भी लड़की के लिए यह कहना मुश्किल है की लड़का सच में अच्छा-भला-नेक है | इसी तरह लड़के के लिए यह बताना बहुत कठिन है कि फोटो में गहने और मेकप से लदी लड़की सचमुच उसकी मन की अप्सरा जैसी सुन्दर है या नहीं | सच तो यह है कि सिर्फ लड़के की तनख्वाह से उसकी अच्छाई नहीं नापी जाती और ना ही केवल चेहरे की सुन्दरता से लड़की के मन का सौंदर्य |
शादी अजीबोगरीब खेल है, इसके नियम अनूठे होते हैं और कहानी कभी रिश्तेदारों से शुरू होती है तो कभी इन्टर्नेट चैट से | लड़के और लड़की के बीच जरूरत से ज्यादा बात हो जाए तो बात बिगड़ भी सकती है इसलिए कुछ लोग सोचते हैं कि शादी से पहले आवश्यकता से अधिक बातचीत उचित नहीं | पर एक दूसरे से मिले बिना आखिर किसी को कोई कैसे जान सकता है ? आमने-सामने नज़र पार हो जाए तो फैसला ऑन-द-स्पोट हो सकता है, पहचान प्यार में भी बदल सकती है और लव मैरेज के चांसेस ज्यादा बनते हैं | अफ़सोस कि हर कोई इतना सौभाग्यशाली नहीं होता ...| वैसे माँ-बाप अपने ज़माने की नज़र से देखते हैं - किसी को गलत तो किसी को सही लगता है | कहीं पे सगाई और रिश्ता जबरदस्ती से किया जाता है तो कहीं स्वेच्छा से वर-वधु अपने जीवन का फैसला करते हैं | जब अपनी ही चोइस से शादी करनी हो, तो क्यों ना अपने पसंद से सपनों की शहज़ादी और घुड़सवार राजकुमार एक दूसरे को खुद जानें-पहचानें ? अगर आपकी शादी हो चुकी है तो आप क्या नसीहत देना चाहेंगे ? जिसकी शादी अभी बाकी है, उसकी क्या अपेक्षाएँ होती हैं अपने पार्टनर-हमसफ़र से ?
किसी लड़के को क्यूट लड़की चाहिए तो किसी को लम्बी, और किसी को मॉडर्न गर्ल पसंद है तो किसी को घरेलु-साड़ीवाली | लड़की भी कभी शाहरुख खान और ऋतिक की उम्मीद करती है तो कभी अम्बानी जैसा करोड़पति | कोई-कोई तो मायके जैसा ससुराल पाना चाहती है | ये सब के सब बहाने हैं - दरअसल सबकी इच्छा एक होती है - जीवन-संगिनी और लाइफ पार्टनर ऐसा मिले जो उनसे बेहद प्यार करे और उनकी कमियों को नज़रंदाज़ करते हुए उन्हें दुनिया भर की खुशियाँ दे | एक दूसरे के बाहों में आने के लिए वो कुछ भी छोड़ने के लिए तैयार रहते हैं और हर पल की दूरी उन्हें तड़प का एहसास दिलाती है | जब तक ऐसा कोई लाइफ पार्टनर नहीं दिखे, लोग अपने हमसफ़र की खोज में लगे रहते हैं |
हर दिन, हर पल जीवन नया मोड़ लेती है | हमें कोई ऐसा चाहिए जो इन सब क्षणों को हमारे साथ गुज़ारे, जीवन की हर घटना का हिस्सा बनके अपना सुख-दुःख बाँट सके, थोडा हँसे-थोडा रोए | एक ऐसा कन्धा का आसरा मिले जो जन्म-जन्मान्तर तक साथ दे | विवाह बंधन में बंधने के बाद शरीर दो और प्राण एक लगे, संसार के बीच एक अपना संसार बसे - शादी ही एक ऐसी चीज़ है जो इस चाहत और ज़रुरत को पूरा कर सकती है | रास्ता कोई भी हो, मंजिल एक होनी चाहिए....शायद लोग इसीलिए शादी करते हैं ......!!!!
-शैलेश मिश्र

9 Comments:
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"टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )
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यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -
वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?
"विवाह बंधन में बंधने के बाद शरीर दो और प्राण एक लगे, संसार के बीच एक अपना संसार बसे - शादी ही एक ऐसी चीज़ है जो इस चाहत और ज़रुरत को पूरा कर सकती है|"
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एकदम ठीक लिखले बानी. बाकर सांच बात ई बा क आजकल के लइका लइकी अब बियाह जइसन संस्था के नकारे लागल बाड़न. आ पति-पत्नी के रिस्ता के महत्व खतम होत जा रहल बा. परिवार टूट रहल बा. अब ना त कवनो पत्नी के लगे एतना धैर्य बचल बा कि ऊ अपना पती के दुख में साथ देव. सब कुछ पइसा के इर्द गिर्द घुम रहल बा. एकरे चक्की में सब रिस्ता-नाता आपन महत्वन के खोवत जा रहल बा. बाकिर इहो सांच बा कि एगो पति के एगो दोस्त जइसन पत्नी के आ एगो पत्नी के एगो दोस्त नीयन पति के जरूरत बा. एकरा से केहू इंनकार नइखे क सकत.
zashusingh@gmail.com
जय श्री कृष्ण...आपके ब्लॉग पर आ कर बहुत अच्छा लगा...बहुत अच्छा लिखा हैं आपने.....भावपूर्ण...सार्थक
" बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "
हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
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Misir ji namaskar. Bhojpuriya boli ke aa aapan maati ke khushbu ke sanjo ke rakhin,ihe apan jad baa. Hmaar shubh kaamnaa baa rauaa aisanhe bides ma apan jad ke sinchat rahin.Jay bhojpuriya......jay bharat. Hamar blog-Bastar ki abhivyakti maa raur ke swagat baa.
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